भारत में ऊर्जा क्षेत्र

     भारत में ऊर्जा क्षेत्र 
- पावर ग्रिड केंद्रीय क्षेत्र में सभी मौजूदा और भविष्य की ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए और राष्ट्रीय पावर ग्रिड के गठन के लिए भी जिम्मेदार है।

- तीन वैधानिक निकाय, यानी, दामोदर घाटी निगम (DVC), भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई), बिजली मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में भी हैं।
- ग्रामीण विद्युतीकरण के कार्यक्रमों को ग्रामीण विद्युतीकर निगम (आरईसी) द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है)।
- पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) बिजली क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए टर्म-फाइनेंस प्रदान करते हैं ।
- स्वायत्तशासी निकाय जैसे कि केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (CPRI) और राष्ट्रीय पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NTPI) बिजली मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में भी हैं।
- पॉवर ट्रेडिंग कॉरपोरेशन को मुख्य रूप से निजी क्षेत्र में मेगा पावर प्रोजेक्ट्स का समर्थन करने के लिए शामिल किया गया है, जो पावर पर्चेज अग्रीमेंट (पीपीए) में प्रवेश करने के लिए एकल इकाई के रूप में कार्य कर रहा है।
- विद्युत मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार ने 4,000 मेगावाट की  अल्ट्रा मेगा पावर परियोजनाएं (यूएमपीपी) की पहल शुरू की।
- भारत में बड़ी क्षमता वाली बिजली परियोजनाओं को विकसित करने के उद्देश्य से नवंबर 2005 में सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शुरुवात की गयी । इन परियोजनाओं के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त की गयी है।
- FDI के लिए स्वचालित स्वीकृति:
- स्वचालित रूप से अनुमोदन (RBI मार्ग) प्रतिशत के लिए विदेशी इक्विटी को (परमाणु ऊर्जा को छोड़कर), पारेषण और वितरण और व्यापार में निवेश की मात्रा पर किसी भी ऊपरी कैप  के बिना व्यापार करने की अनुमति है।
- भारत सरकार ने केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (पॉवर मार्केट) विनियम, 2010 के तहत स्वचालित मार्ग के तहत पंजीकृत बिजली एक्सचेंजों में 49 प्रतिशत तक की एफडीआई की अनुमति दी है।
- सौभाग्‍य - प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना: उद्देश्य: -मार्च 2019 तक भारत में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण हासिल करना।  1-  ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बिजली कनेक्शन से रहित  घरों में 500 रुपये  के भुगतान पर बिजली कनेक्शन 2) सुदूर गांवों में सोलर फोटो वोल्टाइक आधारित प्रणाली प्रदान करना। ३- शहरी क्षेत्रों में गैर-विद्युतीकृत घरों में बिजली कनेक्शन प्रदान करना।
- दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना: उद्देश्य: (क) ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और गैर-कृषि उपभोक्ताओं को आपूर्ति की विवेकपूर्ण भूमिका के लिए कृषि और गैर-कृषि फीडरों को अलग करना; (ख) ग्रामीण क्षेत्रों में उप संचरण और वितरण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण और वृद्धि; और (ग) ग्रामीण क्षेत्रों में पैमाइश (मीटरिंग)।
- देश  में राष्ट्रीय बिजली ग्रिड को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। सभी पांच क्षेत्रीय ग्रिड, अर्थात् उत्तरी क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र, पूर्वी क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और दक्षिणी क्षेत्र को सिंक्रोनस मोड में इंटर-कनेक्ट किया गया है। और जून, 2017 में अंतर-क्षेत्रीय लिंक की कुल हस्तांतरण क्षमता लगभग 75,050 मेगावाट है।
- राष्ट्रीय बिजली निधि योजना: एनईएफ योजना के तहत, गैर-राजीव गांधी ग्रामीण विकास योजना (RGGVY) और गैर-पुनर्गठन त्वरित विद्युत विकास और सुधार कार्यक्रम (R-APDRP) के लिए वितरण क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक बिजली उपयोगिताओं द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इन परियोजनाओं को अब क्रमशः दीनदयालउपध्याय ग्राम ज्योतियोजन (DDUGJY) और एकीकृत विद्युत विकास योजना (IPDS)के अंतर्गत ला दिया गया है ।
- UDAY योजना 2015 में देश भर में DISCOM की परिचालन और वित्तीय अक्षमताओं को निम्न हस्तक्षेप लागत, बिजली की लागत में कमी,बेहतर संचालन क्षमता, राजस्व में वृद्धि के रूप में लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से स्थायी समाधान के लिए शुरू की गई थी ।  UDAY भागीदारी के लिए स्वैच्छिक योजना है और 26 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश इस योजना में शामिल हो चुके हैं। इस योजना की निगरानी एक अंतरप्रांतीय समिति और एक राज्य स्तरीय समिति द्वारा की जा रही है।

- भारत सरकार ने CO2 के उत्सर्जन में न्यूनतम वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए और देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा 

करने के लिए दो प्रमुख दृष्टिकोण अपनाए हैं।

-ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, २००१ के तहत जहाँ एक तरफ नयी पीढ़ी के क्लीनर प्रौद्योगिकियों की ओर बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है,वहीँ दूसरी तरग मांग पक्ष में विभिन्न पहल करके ऊर्जा के कुशल उपयोग की दिशा में जोर दिया जा रहा है।
- ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) की स्थापना कि गई और इसके द्वारा  ऊर्जा खपत उपकरण और उपकरणों के लिए अनिवार्य मानकों और लेबल जैसे कार्यक्रमों, वाणिज्यिक भवनों के लिए ऊर्जा संरक्षण भवन कोड का निर्धारण, कृषि पंपसेट के लिए मांग प्रबंधन कार्यक्रम,  ऊर्जा गहन उद्योगों के लिए ऊर्जा खपत मानदंड, ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना और राजकोषीय प्रबंधन करने जैसे अनेक कार्यक्रम और गतिविधियों को लांच किया है ।
- हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति:-- हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP)  भारत सरकार द्वारा 2016
 में अपनाई। इस निति के लागू होने के बाद से सभी भावी अनुबंधों के लिए HELP निति लागू होगी ।
--प्रमुख विशेषताऐं:--यह एक समान लाइसेंसिंग प्रणाली होगी जो एकल लाइसेंस और नीतिगत ढांचे के तहत सभी हाइड्रोकार्बन, अर्थात् तेल, गैस, कोल बेड मीथेन आदि को कवर करेगी।
- इसके तहत अनुबंध "biddable revenue sharing " पर आधारित होंगे। बोलीदाताओं को अपनी बोली में राजस्व हिस्सेदारी को उद्धृत करने की आवश्यकता होगी और जीतने वाली बोली का चयन करने के लिए यह एक प्रमुख पैरामीटर होगा।
- पारदर्शी कार्यप्रणाली के अनुसार सरकार को राजस्व हिस्सेदारी का सर्वोच्च शुद्ध वर्तमान मूल्य देने वाले  बोली लगाने वाले को इस निति के तहत अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।
- एक ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी लागू की जाएगी, जिसके तहत बोली लगाने वाला किसी भी ब्लॉक की खोज के लिए जो पहले से ही कवर नहीं है के लिए सरकार को आवेदन कर सकता है ।
- गहरे पानी और अति-गहरे जल क्षेत्रों के लिए एक रियायती रॉयल्टी निति  को लागू किया जाएगा। इन क्षेत्रों में पहले सात वर्षों के लिए कोई रॉयल्टी नहीं होगी, और उसके बाद 5% (गहरे पानी वाले क्षेत्रों में) और 2% (अति-गहरे जल क्षेत्रों में) के लिए रियायती रॉयल्टी होगी। । उथले जल क्षेत्रों में, रॉयल्टी दरों को 10% से 75% तक कम किया जाएगा।
- ठेकेदार को घरेलू बाजार में उत्पादित गैस के मूल्य निर्धारण और विपणन के लिए स्वतंत्रता होगी । सरकारी राजस्व को सुरक्षित रखने के लिए, सरकार के लाभ की गणना प्रचलित अंतर्राष्ट्रीय क्रूड मूल्य या वास्तविक मूल्य के उच्चताम स्टार के  आधार पर की जाएगी ।
- वर्तमान में भारत की लगभग 695 प्रतिशत बिजली उत्पादन क्षमता कोयले पर आधारित है। 65 वर्षों में स्थापित क्षमता में   113 गुना वृद्धि के बावजूद भारत अभी भी अपनी चरम बिजली की मांग के साथ-साथ ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करने की स्थिति में नहीं है।
-  भारत ने 2005 के 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 33-35 प्रतिशत कम करने की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता ली है।
- जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC)  के तहत हाल ही में पेरिस में संपन्न 21 वें सम्मेलन में फ्रांस और  भारत ने  2030 तक ग्रीन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और कम लागत वाले गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से ग्रीन जलवायु निधि (GCF) के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय वित्त की मदद से  लगभग 40 प्रतिशत संचयी इलेक्ट्रिक पावर स्थापित क्षमता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सौर शहर कार्यक्रम (Solar Cities Programme )
सौर शहरों के विकास के अंतरगत  मंत्रालय शहरों में ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान तैयार करने में नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों की सहायता करता है।
 सौर शहर कार्यक्रम के उद्देश्य:-
- शहरी स्थानीय सरकारों को सिटी स्तर पर ऊर्जा चुनौतियों का समाधान करने के लिए सक्षम और सशक्त बनाना।
- एक मास्टर प्लान तैयार करने के लिए एक फ्रेमवर्क और सहायता प्रदान करना, जिसमें वर्तमान ऊर्जा स्थिति का आकलन, भविष्य की मांग और कार्य योजनाएं शामिल हैं।
- शहरी स्थानीय निकायों में क्षमता निर्माण करना और नागरिक समाज के सभी वर्गों के बीच जागरूकता पैदा करना।
- योजना प्रक्रिया में विभिन्न हितधारकों को शामिल करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से स्थायी ऊर्जा विकल्पों के कार्यान्वयन की देखरेख करना ।

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